Thursday, October 10, 2013

रावण को बैठा देखकर हनुमानजी भी मोहित हो गए थे

Today's Blog

An article from Dainik Bhaskar - ( Dainik Bhaskar se sabhaar )



श्रीरामचरित मानस में कुल 7 कांड बताए गए हैं। इसमें पहला है बालकांड, दूसरा है अयोध्या कांड, फिर अरण्य कांड, इसके बाद किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंका कांड और अंत में है उत्तरकांड।
रावण की मां का नाम कैकसी था और पिता ऋषि विशर्वा थे। कैकसी दैत्य कन्या थीं। रावण के भाई विभिषण, कुंभकर्ण और बहन सूर्पणखा के साथ ही देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव भी रावण के भाई हैं।

एक बार रावण ने अपनी शक्ति के मद में शिवजी के कैलाश पर्वत को ही उठा लिया था। उस समय भोलेनाथ ने 
मात्र अपने पैर के अंगूठे से ही कैलाश पर्वत का भार बढ़ा दिया और रावण उसे अधिक समय तक उठा नहीं सका। इस दौरान रावण का हाथ पर्वत के नीचे फंस गया। बहुत प्रयत्न के बाद भी रावण अपना हाथ वहां से नहीं निकाल सका। तब रावण ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए उसी समय शिव तांडव स्रोत रच दिया। शिवजी इस स्रोत से बहुत प्रसन्न हो गए।

लंका में प्रवेश करते हुए हनुमानजी ने लंका की भव्यता और सुंदरता देखी, जो कि आश्चर्यचकित करने वाली थी। रात्रि के समय पर बजरंग बली रावण के अंत:पुर में गए तो वहां रावण और रावण की रानियों का सौंदर्य देखते ही बनता था।
लंका में सीता को खोजते हुए हनुमानजी ने पूरी लंका का भ्रमण कर लिया था। अंत में वे अशोक वाटिका पहुंचे जहां सीता को देखकर वे प्रसन्न हो गए। वाटिका में सीता से वार्तालाप करने के बाद हनुमानजी ने रावण की एक वाटिका उजाड़ दी।
रावण को सूचना प्राप्त हुई की एक वानर उनकी वाटिका उजाड़ दी है। जिसके बाद लंकेश ने कई असूर हनुमानजी को पकडऩे के लिए भेजें। सभी असूरों को बजरंग बली ने हरा दिया। अंत में इंद्रजीत हनुमानजी को पकडऩे आया। इंद्रजीत ने दिव्यास्त्र की मदद से हनुमानजी को बंदी बना दिया। बंदी बनाए जाने के बाद जब हनुमानजी लंका के दरबार में पहुंचे तो वे हतप्रभ हो गए।

रावण का दरबार भव्य और सुंदर था, जहां रावण को बैठा देखकर हनुमानजी भी मोहित हो गए थे। रामायण में लिखा है हनुमानजी ने रावण के वैभव को देखते हुए कहा था कि...

अहो रूपमहो धैर्यमहोत्सवमहो द्युति:।
अहो राक्षसराजस्य सर्वलक्षणयुक्तता।।

इस श्लोक का अर्थ यह है कि - रावण रूप-रंग, सौंदर्य, धैर्य, कांति तथा सर्वलक्षणों से युक्त है। यदि रावण में अधर्म अधिक बलवान न होता तो यह देवलोक का भी स्वामी बन सकता था।
बलशाली दशानन ने अपने तप से ब्रह्मा, शिव समेत   अनेक देवों को प्रसन्न किया था। वह पराक्रमी  और ज्ञानी भी था। परंतु प्रकांड विद्वान लंकापति के सारे गुण अहंकार रूपी बुराई में जाकर गुम हो गए।
रावण द्वारा सीता हरण की घटना के पीछे मुख्य रूप से शूर्पणखा का हाथ माना जाता है। बहन शूर्पणखा के प्रति रावण के मन में अगाध प्रेम था।

लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक न काटी होती और शूर्पणखा ने अपने अपमान का बदला लेने के लिए रावण को न उकसाया होता, तो शायद ही सीता हरण का ख्याल रावण के मन में न आता।

रावण बहुत विद्वान, चारों वेदों का ज्ञाता और ज्योतिष विद्या में पारंगत था। उसके जैसी तीक्ष्ण बुद्धि वाला कोई भी प्राणी पृथ्वी पर नहीं हुआ। इंसान के मस्तिष्क में बुद्धि और ज्ञान का भंडार होता है, जिसके बल पर वह जो चाहे हासिल कर सकता है। रावण के तो दस सिर यानी दस मस्तिष्क थे। कहते हैं, रावण की विद्वता से प्रभावित होकर भगवान शंकर ने अपने घर की वास्तुशांति हेतु आचार्य पंडित के रूप में दशानन को निमंत्रण दिया था।

रावण भगवान शंकर का उपासक था। तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस के अनुसार- सेतु निर्माण के समय रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना की गई, तो उसके पूजन के लिए किसी विद्वान की खोज शुरू हुई। उस वक्त सबसे योग्य विद्वान रावण ही था, इसलिए उससे शिवलिंग पूजन का आग्रह किया गया और शिवभक्त रावण ने शत्रुओं के आमंत्रण को स्वीकारा था। 

रावण महातपस्वी था। अपने तप के बल पर ही उसने सभी देवों और ग्रहों को अपने पक्ष में कर लिया था। कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने रावण को अमरता और विद्वता का वरदान दिया था।
रावण को रसायन शास्त्र का ज्ञान था। उसे कई अचूक शक्तियां हासिल थीं, जिनके बल पर उसने अनेक चमत्कारिक कार्य सम्पन्न किए। अग्निबाण, ब्रह्मास्त्र आदि इनमें गिने जा सकते हैं।

*************************************



Dussehra -on13th october 2013. i.e. Sunday.

Today's Blog

FROM - www.online prasad.com

Dussehra is derived from Sanskrit word Dasha-hara which means removal of bad fate. It also represents removal of ten heads of Ravana. Besidesworshipping Sri Ram devotees also pray to Goddess Durga - the one who represents strength, ability and courage. This year Dussehra will be celebrated on13th october 2013. i.e. Sunday.

Dussehra - Significance & Celebration 
  • Worship household & work-related tools, books, computers, cooking pans and vehicles.
  • Performances of the Ramlila in Northern India.
  • A large procession of Maa Chamundeshwari on elephants in Mysore.
Dussehra is considered highly auspicious to start a new venture, project or journey. People also exchange gifts and wish each other. 

Burn your tensions and sorrows with the effigy of Ravana.

Light the hopes of happiness, wealth and prosperity.

Eliminate Sin, Evil and Negativity around you.




परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् |

धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ||

Meaning: For the protection of the good, for the destruction of the evil and for the establishment of dharma (righteousness), I (the Lord) am born from age to age.